Sohil Barelvi

फिर से उदासी छा गई है सात साल बाद
माज़ी की याद आ गई है सात साल बाद

अंदर से खोखला किया बाहर के प्यार ने
दीमक शजर को खा गई है सात साल बाद

मुझ पर अज़ाब टूटने थे यार एक रात
आख़िर वो रात आ गई है सात साल बाद

उस ने भी जीना सीख लिया सात साल में
मुझ को भी मौत आ गई है सात साल बाद

बुलबुल मकान-ए-दिल को गई छोड़ कर मगर
कर के दरीचे वा गई है सात साल बाद
Sohil Barelvi