लड़ती नहीं लड़ाती है,
हरदम सिंग खुजाती है |
अंदर अंदर चतुर सयानी,
बाहर बाहर बच्ची है |
ऐसी बातें करती है,
जैसे अकल से कच्ची है,
छत विछत कलेजा कर जाए,
ऐसी बात सुनाती है |
लड़ती नहीं लड़ाती........
चतुर लोमड़ी सी रहतीं,
है चालाकी में दूना,
एक हाथ में मक्खन रखती,
एक हाथ में चूना,
पहले मस्का मार लुभाती,
चूना पुनः लगाती है |
लड़ती नहीं लड़ाती.......
देखो कैसे सबके दिल में,
अपना फोटो खींच गई,
तनिक समय भी नहीं लगा,
वह दो मितरो के बीच गई,
भाई भाई में बैर करा,
ख़ुद अच्छी बनती जाती है |
लड़ती नहीं लड़ाती......
एक दूसरे को देखो,
वह कैसे कैसे तोड़ रहीं,
व्यवहार कुशल कहलाने को,
वह सबसे रिश्ता जोड़ रहीं,
जिसको जैसा चाह रहीं है,
वैसा नाच नचाती है |
लड़ती नहीं लड़ाती.........
राजेश यादव 'करिया'