Anamika Singh

दिलों में नफ़रतों के घर बनाए जाएँगे
मगर न प्रेम के अक्षर बनाए जाएँगे

कहीं जो भूल से हम-आप सच न समझे तो
ये तय है सोच से कातर बनाए जाएँगे

पहाड़ तोड़ेंगे, जंगल को काट देंगे फिर
हमारे खेत भी बंजर बनाए जाएँगे

चुनाव हम जो करेंगे बग़ैर सोच-समझ
तो अपने हाल ही बदतर बनाए जाएँगे

जुटानी होंगी हमें हिम्मतें अँधेरों में
नहीं तो रोज़ नये डर बनाए जाएँगे

कटे जो पेड़ तो हैं सोच में परिन्दे सब
कहाँ पे घोंसले, कोटर बनाए जाएँगे

कमाल छाप रहेगी ही उम्र भर उनकी
निशान मन को जो छूकर बनाए जाएँगे

'अना' वो दिन भी कभी आएगा कि दुनिया में
कहीं न बम, न ही बंकर बनाए जाएँगे
Anamika Singh

Anamika Singh | We The Sukhanwar