चिमनियाँ, तीलियाँ, डोरियाँ चाहिए
दाहने, टाँगने बीवियाँ चाहिए
सेंकने रोटियाँ अपने घर की तुम्हें
सिर्फ़ औरों के घर बेटियाँ चाहिए
जो सितम सहके भी बोलती कुछ न हों
बज़्म में वो हसीं तितलियाँ चाहिए
हुक्म जो रात-दिन उनका माना करें
उनको साथी नहीं दासियाँ चाहिए
रोकने को दमन जिस्म और रूह पर
खेलनी फाइनल पारियाँ चाहिए
आप इंसान तो हम भी इंसान हैं
आत्मसम्मान संग झप्पियाँ चाहिए
वक़्त रहते ज़ुबाँ खोल दो लड़कियो
ज़िन्दगी की हमें चाबियाँ चाहिए
Anamika Singh