उसके शहर में आए हैं उसको ख़बर मिले
मुद्दत के बाद ही सही अब तो नज़र मिले
हमको अभी भी याद हैं उसकी शरारतें
कह दूँ न कह सका जो, वो अब के अगर मिले
या तो वो आप ही कहे जो उसके दिल में था
या फिर बिना सुने हुए हमको सबर मिले
उस दौर को गये हुए कितने बरस हुए
फिर भी हैं उसकी याद के कितने भँवर मिले
चुपके से दूँ मिटा जहाँ जब हम जुदा हुए
उस वक़्त की लकीर को ऐसी रबर मिले
Anamika Singh