Anamika Singh

बीते पलों के फिर वही मौसम नहीं हुए
तुम भी नहीं हुए तो कभी हम नहीं हुए

कितनी कलाइयाँ कटीं कितने टँगे मिले
बेरोज़गार फिर भी यहाँ कम नहीं हुए

गांधी, सुभाष और भगत को पढ़ा मगर
उनकी तरह तो आज तलक हम नहीं हुए

औरत पे ही तमाम लगीं बंदिशें वहाँ
आदम के भेष में जहाँ आदम नहीं हुए

कितने ही गीत और ग़ज़ल कह चुके सभी
आलोचकों की आँख में ऑसम नहीं हुए

चूल्हों में झोंक दी गईं ज़िंदा ही औरतें
शौहर हुए जहाँ, कभी हमदम नहीं हुए

कितनी उदास होके उठी होंगी सब ‘अना’
लाशें वो जिनपे ठीक से मातम नहीं हुए

Anamika Singh

Anamika Singh | We The Sukhanwar