कोई आया और हमारा हो बैठा
मुमकिन कब था फिर भी सारा हो बैठा
बीच भँवर में हम डूबे-उतराये फिर
हाथ बढ़ाया और किनारा हो बैठा
दुनिया तो है एक करेला नीम चढ़ा
वो आया और शक्करपारा हो बैठा
थिर थी झील हमारे मन की कबसे ही
उसका आना बहती धारा हो बैठा
तारे, जुगनू , तितली, भौंरे सब हक-बक
बेचारों का ख़ूब खसारा हो बैठा
महका-महका ये सारा ही मंजर है
उसका आना फूल हज़ारा हो बैठा
मन पर मेरे छाप दिया है नाम अपना
इक पगला यों गोदनहारा हो बैठा
मारा-मारी क्या ही कम थी दुनिया में
औ तिस पर वो इश्क़ का मारा हो बैठा
पहले चाँद कहा हमको फिर अगले पल
वो चंदा के पास का तारा हो बैठा
Anamika Singh