सब ही ईमानदार हैं तो बेईमान कौन?
ये जानने को इक करे दुनिया-जहान कौन?
इसमें छिपाने की है भला बात क्या बता
मत दे सफाई है पता कि किसकी जान कौन!
जो देखते हैं ध्यान से हर ज़ुल्म, हर सितम
वो सोचते हैं बेवजह खोले ज़ुबान कौन?
हम रस्सियों पे झूल गये ज़िंदगी से हार
तो हौसले के नाम पे देगा बयान कौन?
पंखों को टोह रोज़ नए हौसले के साथ
देखें कि रोक पाता है तेरी उड़ान कौन?
सुख-दुख रहे हैं साथ ही जीवन में इस तरह
पकड़े हुए पता नहीं किसकी कमान कौन?
होगी वजह कुछ और भी मन में दबी हुई
रखता है दोस्तों का भला इतना ध्यान कौन?
हर कोई दूसरों की तरह चाहे दीखना
होना है चाहता ‘अना' अपने समान कौन?
Anamika Singh