Anamika Singh

जो दीवारों के सर पे कान होते
भरोसे तब कहाँ आसान होते

समझदारी दिखाई दिल ने मेरे
बड़े वरना यहाँ नुक़सान होते

हमें कोई गणित आता नहीं था
अगर आता, किसी की जान होते

तबाही कर हुआ अफ़सोस होगा
नहीं तो क्यों थमे तूफान होते

इलेक्शन की टसल होती नहीं तो
जले न गाँव के खलिहान होते

हमें फ्लैटों में कैसे नींद आती
अगर सो ही गये दरबान होते

बड़ा गाढ़ा है वो चुप ही रहेगा
रहें कब तक हमीं हलकान होते

लुभातीं ख़ुशबुएँ उसको अगर तो
'अना' हम भी हुए लोबान होते

हमें इन मुश्किलों ने टफ किया है
नहीं तो हम 'अना' आसान होते
Anamika Singh

Anamika Singh | We The Sukhanwar