लाश पर न्याय माँगने बैठे!
इससे पहले कहाँ रहे बैठे!
जो थी ज़िन्दा तो मुँह सिले थे सब
बाद मरने के सब गले बैठे!
खड़ी इक पाँव पे वो सदियों से
कोई आदम है जो कहे- बैठे?
साथ देता कोई ज़रूरत पर
उस समय सब रहे सगे, बैठे!
ज़ुल्म की दी ख़बर थी बेटी ने
चुप्पियों ने कहा सहे, बैठे!
उठ खड़े होंगे जब भी चाहेंगे
आज हम मौज में भले बैठे!
ये ‘अना‘ यों नहीं कमाई है
इससे सहमे हैं जलजले बैठे!
Anamika Singh