Anamika Singh

सवाल सौ हैं सामने कोई तो इक जवाब हो
जवाब हो सवाल का न हो तो इंक़लाब हो

कमाए क्या, खिलाए क्या है सोचता ये शख्स वो
समय की मार पड़ गई कि जिसपे बेहिसाब हो

सुबह से आधी रात तक डटी हैं जो रसोई में
'किया है क्या?' की बात पर हिसाब से हिसाब हो

'अना' अगरचे बोल दे तो होगा कुछ नया नहीं
जनाब आप पहले ही से पूरे बेनक़ाब हो

गया है भीग वो जो सूखने की एक आस में
सड़क पे जो अनाज उसपे और मत अज़ाब हो

'अना' भरोसा तोड़कर जो लौटने को कह रहा
ये तुझपे है किसी भी तौर वो न कामयाब हो
Anamika Singh