Anamika Singh

बदनाम जो गली वहाँ जाते भले हैं लोग
सुनकर दबाते उँगलियाँ दाँतों तले हैं लोग

जो चुप रहे वे पच गए लेकिन मुखर हैं जो
वे ही समाज को बड़े अकसर खले हैं लोग

हालात से दुखी हुए, दुख से बिखर गये
छत से लटक गए कहीं ज़िंदा जले हैं लोग

बदलाव के लिए वे जो तन्हा ही थे चले
उन बा-कमाल लोगों के पीछे चले हैं लोग

चलते तिराहे, चौक पे या बोगियों में देख
रोज़ी की खोज़ में यहाँ कितने गले हैं लोग

ढलते ही शाम घर में मिलें सारी लड़कियाँ
यानी कि साफ़ है यहाँ कितने भले हैं लोग
Anamika Singh

Anamika Singh | We The Sukhanwar