बदनाम जो गली वहाँ जाते भले हैं लोग
सुनकर दबाते उँगलियाँ दाँतों तले हैं लोग
जो चुप रहे वे पच गए लेकिन मुखर हैं जो
वे ही समाज को बड़े अकसर खले हैं लोग
हालात से दुखी हुए, दुख से बिखर गये
छत से लटक गए कहीं ज़िंदा जले हैं लोग
बदलाव के लिए वे जो तन्हा ही थे चले
उन बा-कमाल लोगों के पीछे चले हैं लोग
चलते तिराहे, चौक पे या बोगियों में देख
रोज़ी की खोज़ में यहाँ कितने गले हैं लोग
ढलते ही शाम घर में मिलें सारी लड़कियाँ
यानी कि साफ़ है यहाँ कितने भले हैं लोग
Anamika Singh