जो कर रहे सवाल वे हैं सब रडार पर
हम आ गये हैं देख लो कैसे कगार पर
संगीन जुर्म होते रहे जिसपे ही सदा
फोड़े गये हैं ठीकरे उसके कपार पर
जीते जी रो सकी न है अश्लील हर वो आँख
फिर झूठ-मूठ रोये जो जाकर मजार पर
बूँदें बिखरके भी ये बड़ा काम कर गयीं
रख दी तपी ज़मीन की सूरत सँवारकर
हमको लगा था होगा वो पक्का ज़ुबान का
अफ़सोस! वो भी आ गया चेहरा उतारकर
आँखें कभी जो हो गयीं नम फ्लैशबैक से
यादें हैं आ गिरीं मेरे मन के कछार पर
रोटी, ज़मीन, नौकरी सबकुछ निगल गए
सत्तानशीन लेते नहीं हैं डकार पर
हासिल किसी को है यहाँ भरपूर ताम-झाम
कुछ जी रहे हैं आज भी रोटी-अचार पर
Anamika Singh