ये हिज्र का मौसम गुज़र ही जायेगा
ये दर्द भी दिल में ठहर ही जायेगा
पा तो लिया रुतबा नया तूने यहाँ
कच्चा नशा आख़िर उतर ही जायेगा
काली घटा छाई है तो डरता है क्यों
सूरज नया कल तक उभर ही जायेगा
मतलब निकल आये अगर ऐ हम-सफ़र
खा कर क़सम तू भी मुकर ही जायेगा
क़ाज़ी ज़रा, रख हौसला, दिल में अभी
तेरा मुक़द्दर भी सँवर ही जायेगा
Dr Wasif Quazi