डाल दो जिसपे नज़र उसको दिवाना कर दो
थाम लो हाथ जिसे उसका ज़माना कर दो
तीर नज़रो से मिरे दिल को निशाना कर दो
इश्क़ में मेरे फ़ना हो के फ़साना कर दो
कब तलक यूँ ही फिरूँगा मैं तो मारा मारा
अपने ही दिल में यूँ मेरा भी ठिकाना कर दो
ग़म की दहलीज़ पे बैठा रहूँ कब तक आख़िर
तुम जो चाहो तो मिरे ग़म को तराना कर दो
तुझ को देखें जो ये महफ़िल तो करें सरगोशी
तुम जो आ जाओ तो मौसम को सुहाना कर दो
रोज़ गलियों से तेरे यूँ ही गुज़रता जाऊँ
छत पे आने का तो कुछ तुम भी बहाना कर दो
यूँ ना छेड़ो लब ओ रुख़्सार को मेरी जानाँ
तुम जो हँस दो तो ज़ईफ़ो को दिवाना कर दो
मेरे बच्चे ही उसे बोले जो मम्मी मम्मी
मेरे मौला वो चमत्कार पुराना कर दो
Dheeraj kumar verma