Utkarsh Khare

दिल किसी मोड़ पर थका होगा,
फिर कोई फ़ैसला हुआ होगा।

ख़्वाब आँखों में मर गए होंगे,
तब कहीं आदमी हँसा होगा।

घर तो आबाद दिख रहा है पर,
कोई अंदर से ढह रहा होगा।

हर किसी को जो राह देता था,
ख़ुद किसी मोड़ पर फँसा होगा।

अपने बच्चों की भूख के आगे,
बाप कितनी दफ़ा झुका होगा।

मौत आसान हो गई होगी,
ज़िंदगी ने थका दिया होगा।
Utkarsh Khare