बात करते, कोई नाला, कोई शिकवा करते
कुछ तो रिश्ते को बचाने का वसीला करते
रूठते, लड़ते, झगड़ते भले जी भर लेकिन
बात दिल में ही न रखकर यूँ पराया करते
हो गई हमसे ख़ता हमने ये माना लेकिन
इक ख़ता पर ही तो रिश्ते नहीं तोड़ा करते
दिल तो क्या चीज़ है हम जान भी दे देते अगर
आप इक बार मुहब्बत से तक़ाज़ा करते
हार कर ओढ़ ली हमने भी लबों पर चुप्पी
राबिता ही न रखा उसने तो हम क्या करते
रूठना आपका और मान-मनुव्वल मेरी
कट गई उम्र यही खेल-तमाशा करते
जैसे ‘मधुमन‘ को यक़ीं आप पे है काश यूँ ही
आप भी उसपे कभी वैसे भरोसा करते
Madhu Madhuman