Dheeraj kumar verma

घनी हो रात या हो दिन ये अक्सर ढूँढ़ लेते हैं
ये भौंरे की तरह फूलों का मंज़र ढूँढ़ लेते हैं
बड़े बेदर्द दिल इनके, तरस भी ये नहीं खाते
मुसीबत में कमाने के ये अवसर ढूँढ़ लेते हैं
Dheeraj kumar verma

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