रात को दिन तो कहीं आग को पानी लिख कर,
चल दिए लोग यहाँ झूठी कहानी लिख कर।
अब नया दौर, नए लोग हमें कहते हैं,
मत करो शोर यहाँ बात पुरानी लिख कर।
इक तेरी आँख के हैं लाख इशारे, दिलवर,
हम कहाँ दर्ज करें लफ़्ज़-ओ-मआनी लिख कर।
हाथ में आए मेरे चंद रक़ीबों के ख़ुतूत,
ज़िक्र करते हैं तेरा रूप की रानी लिख कर।
तुम जो आसान-सी बातों में ग़ज़ब करते हो,
हम न कर पाए कोई बात सयानी लिख कर।
Ganesh Kumar