ज़िंदगानी पे बात की जाए
रायगानी पे बात की जाए
दफ़अतन याद आ गई उसकी
बेईमानी पे बात की जाए
सबके किरदार हो गए गूँगे
किस कहानी पे बात की जाए
फूल-कलियों को जेब में रखकर
बाग़बानी पे बात की जाए
उसके आँसू को दरगुज़र करके
सुरमेदानी पे बात की जाए
रब्त का सिलसिला ज़रूरी है
जब रवानी पे बात की जाए
हो गई लफ़्ज़ पर बहुत तकरार
अब मआनी पे बात की जाए
हम ग़रीबों को हुक्म आया है
राजा-रानी पे बात की जाए
क़त्ल मंसूबा बंद था लेकिन
नागहानी पे बात की जाए
उम्र-भर क्या उदास रहना है
शादमानी पे बात की जाए
आज की महफ़िल-ए-सुख़न में मिरी
बेज़बानी पे बात की जाए
शाज़िया क्यों बरहना लोगों में
शेरवानी पे बात की जाए
Shazia niyazi