मेरी तन्हाई ने जीने का कसम तोड़ दिया
यार लहजे ने जवानी का भरम तोड़ दिया
अब किसी शख़्स में ईमान रहे भी तो कहाँ
हर तरफ़ लोगों ने रिश्तों का करम तोड़ दिया
हमने तामीर किया था जिसे अरमानों से
एक सच ने उन्हीं ख़्वाबों का मनम तोड़ दिया
उसने इल्ज़ाम की बारिश भी अजब ढंग से की
लोग कहते हैं मिरे हक़ का कलम तोड़ दिया
दिल पे भारी थी कई रोज़ से तन्हा रातें
आँसुओं ने सभी सब्रों का अलम तोड़ दिया
अब ग़ज़ल और भी ख़ामोश हुई है कामिल
दर्द ने शे'र का सारा ही भरम तोड़ दिया
Kunal kumar