Dheeraj kumar verma

अपनी बातों से अगर यूँ ही मुकर जाएगा
ध्यान रखना तू मिरे दिल से उतर जाएगा

ऐ मेरे दोस्त मुझे इसका नहीं था एहसास
ग़ैर से मिलना मिरा तुझको अखर जाएगा

कुछ दिनों तक ही जवानी का नशा रहता है
रफ़्ता-रफ़्ता ये नशा सर से उतर जाएगा

अब किसी और के आने की ज़रूरत ही नहीं
उसके आने से ही अब घर मिरा भर जाएगा

ये तो सच है कि मैं तन्हाई में मर जाऊँगा
छोड़कर अब वो मिरा साथ अगर जाएगा
Dheeraj kumar verma