मुफ़लिसी, बेबसी में ज़िंदा हैं
हम कहाँ ज़िंदगी में ज़िंदा हैं
हम दिया हैं, हमें तो जलना है
हम तो बस तीरगी में ज़िंदा हैं
जिस्म देखेंगे देखने वाले
हम तेरी सादगी में ज़िंदा हैं
अपने सब ग़म तू हमको दे जानाँ,
हम तो तेरी ख़ुशी में ज़िंदा हैं
मुद्दतों पहले मर चुके हैं हम
अब तो बस शायरी में ज़िंदा हैं
Shivam Sharma