कटते हुए शजर हरे दिन-रात देख कर
हैरान हूँ मैं बाग़ के हालात देख कर
आँसू रुके न रोके से आँखों में दोस्तों
ज़ख़्मों के उसके दिल पे निशानात देख कर
नादान था वो कितना जो सूरज से लड़ गया
जुगनू को बात करनी थी औक़ात देख कर
सबकी शदीद प्यास अधूरी ही रह गई
रूठी हुई जहान से बरसात देख कर
सड़कें खुदी पड़ी हैं, निशाँ पानी का नहीं
क्यूँ बोलता नहीं कोई हालात देख कर
छोटा बड़ा न कोई बराबर सभी यहाँ
महफ़िल में आ गया हूँ यही बात देख कर
रोशन करेगा नाम तू माँ-बाप का 'विमल'
पंडित ने उसको बोला था कल हाथ देख कर
Vimal kumar vimal