Sanjivv Kummar

है लाल ख़ून अवाम का, आते उबाल हैं
हाकिम को लग रहा है, बस आँखें ही लाल हैं

रहते हैं ज़ुल्म ज़िन्दा लगातार सिर्फ़ तब
जब देश की अवाम के मरते सवाल हैं

बेचारे हैं, शरीफ़, वफ़ादार हैं ये लोग
घिस दो दिमाग, आप भी तो रेग-माल हैं

इस बार फिर से आप ही जीतेंगे, मान लो
इस बार भी तो आप ही के पास जाल हैं

सोचा पिता की जेब से इक नोट खींच लूँ
देखा तो उसकी जेब में भीगे रुमाल हैं
Sanjivv Kummar

Sanjivv Kummar | We The Sukhanwar