Farman Meer

इसी बहाने तेरे काम आते रहते हैं।
रक़ीब लेके तेरा नाम आते रहते हैं।

गुलाब ख़ुशबू परी नज़्म कहके दिन काटा
तुम्हारे नाम मेरे काम आते रहते हैं।

निबाहने की है आदत वफ़ा-शिआर हैं हम
सो बेवफ़ाई के इल्ज़ाम आते रहते हैं।

मज़ा तो तब है किसी रोज़ तुम भी आ जाओ
के हम तो रोज़ तहे-दाम आते रहते हैं।

गुलाब भेजा किसी ने किसी ने ख़त मुझको
हरा है पेड़ हरे आम आते रहते हैं।
Farman Meer

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