Farman Meer

नहीं मिलेगा कोई रास्ता कहीं से तुम्हें।
गुज़रना होगा मेरी जिस्म की ज़मीं से तुम्हें।

इसी उमीद पे इज़हार से किया इंकार
ज़रा तो फ़र्क़ पड़ेगा मेरी नहीं से तुम्हें।

तलाश करता हूँ दिल के तमाम कोनों में
रक़ीब लेके गया है यही कहीं से तुम्हें।

बुरा न मानो तो बस इतना पूछना है मुझे
थकान होती तो होगी नहीं नहीं से तुम्हें।
Farman Meer

Farman Meer | We The Sukhanwar