Arshad Rasool Badayuni

तुम दूर जा चुके हो हमारे गुमान से
वापस न होगा तीर निकलकर कमान से

जैसे कि दिल से रूह का होता है राब्ता
रिश्ते हमारे ऐसे हैं हिन्दोस्तान से

चेहरे पे रौशनी है, मगर दिल में है धुआँ
ये शहर जल रहा है बहुत इत्मिनान से

उलझे हुए हैं फ़िरक़ा परस्ती में सब के सब
रिश्ता है आरती से न मतलब अज़ान से

इंसाफ़ कर रहे हैं वही लोग आजकल
जिनको नहीं है कोई ग़रज़ संविधान से

अपना कोई वजूद बना कर तो देख ले
कब तक शिनाख़्त होगी तेरी ख़ानदान से

छोड़ा न गर्दिशों ने कभी भी हमारा साथ
अटके ख़जूर में जो गिरे आसमान से

किरदार से हमारे अगर मुतमइन नहीं
हम दूर जा रहे हैं तेरी दास्तान से
Arshad Rasool Badayuni

Arshad Rasool Badayuni | We The Sukhanwar