लबों पर लग गए ताले हमारे
बड़े जब से हुए बच्चे हमारे
ढिंढोरा ख़ूब पीटा जा रहा है
मगर आए न दिन अच्छे हमारे
दिलों में ज़हर ऐसा घुल गया है
फ़रेबी हो गए रिश्ते हमारे
हुईं जब क़ुरबतें हासिल तुम्हारी
उतारे चाँद ने सदके हमारे
ख़ुद अपनी लाश हम कब तक उठाएं
थके जाते हैं अब काँधे हमारे
हमें मालूम है अंजाम अपना
इरादे फिर भी है पक्के हमारे
हमारी भूख का क़िस्सा अलग है
निवाले खा गए चूल्हे हमारे
नज़र आई जहाँ दीवार कोई
वहीं से रास्ते निकले हमारे
Arshad Rasool Badayuni