Arshad Rasool Badayuni

लेके होंठों पे प्यास बैठे हैं
खुश्क दरिया के पास बैठे हैं

बंद आंखों को कर लिया हमने
लोग कुछ कम-लिबास बैठे हैं

पेड़ कटवा दिया तरक़्की ने
सब परिंदे उदास बैठे हैं

ख़त्म जब कर दिए सभी रिश्ते
आप क्यों मेरे पास बैठे हैं

मेरा जाना समझ नहीं आता
बज़्म में लोग ख़ास बैठे हैं

फिर से क्या कोई ख़्वाब टूटा है
आप क्यों बदहवास बैठे हैं

जिनपे अंधा यक़ीन था 'अरशद'
वो ही दुश्मन के पास बैठे हैं
Arshad Rasool Badayuni

Arshad Rasool Badayuni | We The Sukhanwar