वो ख़ता करके सज़ा को तरसेगा
रफ़्ता-रफ़्ता वो वफ़ा को तरसेगा
इश्क़ का जो रोग उसने पाला है
ज़िन्दगी-भर वो दवा को तरसेगा
बंद करके खिड़कियाँ ख़ुश है मगर
जान लेना वो हवा को तरसेगा
शब की तारीकी जो गहरा जाएगी
वो चराग़ों की ज़िया को तरसेगा
दिल का शीशा तोड़कर चल तो दिया
उम्र-भर मेरी दुआ को तरसेगा
बाँटता है जो यहाँ दर्द-ओ-अलम
देखना वो ही शिफ़ा को तरसेगा
आँख का पानी मरा जिस बंदे का
आदमी अब वो हया को तरसेगा
आज 'क़ाज़ी' ने बचा ली है अना
देखना वो अब निदा को तरसेगा
Dr Wasif Quazi