आप जब से हो गए मंसूब मेरे नाम से
मिल गए हैं दिल को मेरे कुछ नए आयाम से
बादलों की ओट से जब चाँद का चेहरा दिखा
यूँ लगा जैसे मिली हो राधिका घनश्याम से
सब मिरे किरदार की अज़्मत से वाक़िफ़ हैं यहाँ
कुछ नहीं बिगड़ेगा मेरा अब किसी इल्ज़ाम से
मुस्कराके हमने उससे कह दिया ख़ुश-आमदीद
मौत जब आई है मिलने ज़िंदगी की शाम से
मस्लहत ने कर दिया है शहर-भर को अजनबी
वरना सब वाक़िफ़ थे कल तक हर किसी के नाम से
रास्तों की मुश्किलों ने हौसला कुछ यूँ दिया
डर नहीं लगता हमें अब इश्क़ के अंजाम से
Devmani Pandey