अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'

युग – युगांतर से कथा बस एक दोहराई गई।
प्रेम – सरिता के तटों से प्यास लौटाई गई।
भाग्य राधा के विधाता ने लिखा है चिर विरह।
कृष्ण के सँग में सदा से रुक्मिणी ब्याही गई।
अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'