बिना यत्न के सारे वैभव, हर प्रकार तज देते हैंस्वाभिमान से हीन रहे तो, स्वर्ग द्वार तज देते हैंजिन्हें स्वेद से सिंचित श्रम का, पारिश्रमिक लुभाता होऐसे मेहनतकश पौरुष वर, चमत्कार तज देते हैंअंकित शर्मा 'इषुप्रिय'