Anis shah anis

बदलने का तेरे दुख तो नहीं पर
मैं शर्मिंदा हूँ ख़ुद अपने यकीं पर

हमीं लाये हैं गंगा इस ज़मीं पर
किया है बंद भी पानी हमीं पर

किये हैं इतने सजदे उस ख़ुदा को
निशां देखे कोई मेरी जबीं पर

मुझे क़ातिल दिखाना था सो छिड़के
ये ख़ूं के छीटे मेरी आस्तीं पर

नहीं देगा दिखाई साफ़ तुझको
घना कोहरा जो है दिल की ज़मीं पर

उठा लाये हैं हम इल्ज़ाम सारे
सभी इनआम छोड़ आये वहीं पर

हमारे फल ज़माने के लिए हैं
तो बरसेंगे ये पत्थर भी हमीं पर

'अनीस' इतने नशे में चूर है वो
कहीं पर हैं क़दम, रस्ता कहीं पर
Anis shah anis

Anis shah anis | We The Sukhanwar