Arvind Asar

सब मुझसे पूछते हैं मोहब्बत का क्या हुआ,
बेचैन दिल के दर्द की शिद्दत का क्या हुआ।

थक हार के ख़मोश हो अब झील की तरह,
साग़र की लहरों वाली हिमाकत का क्या हुआ

अरसे से कोई खोज-ख़बर ही नहीं मेरी,
हर रोज फ़ोन करने की आदत का क्या हुआ।

माना ज़माना प्यार का दुश्मन बना, मगर,
मजनू सरीख़ी आपकी वहशत का क्या हुआ।

दोनों अलग अलग ही बसाए हुए हैं घर,
हर जन्म साथ रहने की हसरत का क्या हुआ।

मजबूरियों ने तुझको शिखंडी बना दिया,
तेरे बदन की भीम सी ताक़त का क्या हुआ।

अन्याय पर तुम्हें तो बहुत रोष था 'असर'
अन्याय के ख़िलाफ़ बग़ावत का क्या हुआ।
Arvind Asar

Arvind Asar | We The Sukhanwar