Shravan Kumar

तुझे उस गली से ही जाना पड़ेगा
के जिस रास्ते में ज़माना पड़ेगा

तू सच्चा है इतना ही काफी नहीं है
तुझे करके साबित दिखाना पड़ेगा

कभी रोशनी तुझको चुभने लगेगी
कभी ख़ुद दिए को बुझाना पड़ेगा

तू जिसकी नज़र से बचाएगा ख़ुद को
उसी की नज़र में ही आना पड़ेगा

जहाँ आग बरसेगी ओले गिरेंगे
तुझे घर वहीं पर बनाना पड़ेगा

उठाया है जिसने मेरा सर जहाँ में
ये सर उसके आगे झुकाना पड़ेगा

मुदावा नहीं दिल लगाने से बेहतर
किसी दिन तुम्हें दिल लगाना पड़ेगा
Shravan Kumar

Shravan Kumar | We The Sukhanwar