Arshad Rasool Badayuni

इस मुल्क की मिट्टी से जिसे प्यार नहीं है
बेशक़ वो यहाँ रहने का हक़दार नहीं है

तहरीर में ईमाँ की अगर धार नहीं है
वो चाहे बने कुछ भी क़लमकार नहीं है

सीने पे हैं सब, पीठ पे इक वार नहीं है
उस शख़्स पे तोहमत कि वफ़ादार नहीं है

दुनिया के बदले बेच दूँ, आसार नहीं है
इस दर्जा भी सस्ता मेरा किरदार नहीं है

अफ़सोस उसी से ही ज़िया माँग रहे हैं
जो शख़्स उजालों का तरफ़दार नहीं है

वो फ़िक्र-ए-जहाँ से कभी आज़ाद न होगा
जो शख़्स मुहब्बत में गिरफ़्तार नहीं है

हर शख़्स को मैं दोस्त बनाता नहीं ‘अरशद’
हर शख़्स यहाँ आइना-किरदार नहीं है
Arshad Rasool Badayuni

Arshad Rasool Badayuni | We The Sukhanwar