Suraj Kumar Mayank

हिस्से में वही क़ैस की जागीर लगी है
हम जैसे दिलेरों को भी शमशीर लगी है

सोने की है या लोहे की मुद्दा नहीं है ये
मुद्दे की है ये बात, क्यों ज़ंजीर लगी है

ऐसा है ख़ता आपके चारा-गरी का नईं
शायद मुझे ये चोट ही गंभीर लगी है

अब तक भी तेरे झूठ में सच खोज रहा हूँ
अब तक भी मिरे म्यान में शमशीर लगी है

ये तो कहो के मुझको यकीं हौसले पे है
वरना तो डुबाने को ये तक़दीर लगी है
Suraj Kumar Mayank

Suraj Kumar Mayank | We The Sukhanwar