हिस्से में वही क़ैस की जागीर लगी है
हम जैसे दिलेरों को भी शमशीर लगी है
सोने की है या लोहे की मुद्दा नहीं है ये
मुद्दे की है ये बात, क्यों ज़ंजीर लगी है
ऐसा है ख़ता आपके चारा-गरी का नईं
शायद मुझे ये चोट ही गंभीर लगी है
अब तक भी तेरे झूठ में सच खोज रहा हूँ
अब तक भी मिरे म्यान में शमशीर लगी है
ये तो कहो के मुझको यकीं हौसले पे है
वरना तो डुबाने को ये तक़दीर लगी है
Suraj Kumar Mayank