भूल बैठें थे हम कुछ पहर के लिए
घर से निकले थे हम किस सफ़र के लिए
शह्र में ख़्वाब पूरे हुए हैं मगर
मैं हुआ अज़नबी गांव घर के लिए
मान लेते हैं हम ये अलग बात है
रूठता कौन है उम्र भर के लिए
तू नही साथ फिर भी मुझें है गुमाँ
तेरी यादें हैं काफ़ी गुज़र के लिए
आप मालिक हैं,दुनिया है सब आपकी
सोचिए कुछ तो मुझ दर-बदर के लिए
शाम होने पे अहसास मुझको हुआ
उम्र बर्बाद की बेकदर के लिए
आप 'रूबी' की रखते हैं पल पल ख़बर
दोस्तों! शुक्रिया इस ख़बर के लिए
Rubi Gupta satyendra