Shashank Singh Thakur "SAAHIL"

दिन किसी हाल ये वापस नहीं आने वाले
छोड़ दे ज़िद को मुझे छोड़ के जाने वाले

आगे बढ़ते हो कभी पीछे पलट आते हो
ऐसे होते हैं भला साथ निभाने वाले

हाए! रूसवाईयाँ इल्ज़ाम चुभन आह-ओ-फुगाँ
और क्या इस के सिवा देंगे ज़माने वाले

अब कहाँ आऐगा वो शख़्स जो टाँकेगा बटन
मेरे कुर्ते में नया काज बनाने वाले

मुझ को उन के ही रक़ीबों ने ये ख़बर दी है
हैं पशेमान मुझे छोड़ के जाने वाले

बिस्तर-ए-मर्ग़ से उठ सकता नहीं मैं, सुन ले
मुझ को रोते हुए सीने से लगाने वाले

दिन निकलते ही मुझे भूल ना जाऐं साहिल
कल हसीं रात मेरे साथ बिताने वाले
Shashank Singh Thakur "SAAHIL"

Shashank Singh Thakur "SAAHIL" | We The Sukhanwar