Dr Wasif Quazi

मुहब्बत का तेरी असर हो गया है
ज़माने से दिल बेख़बर हो गया है

सितारों से आगे निकल कर तो देखो
ये नीली फ़ज़ा का सफ़र हो गया है

दिखाया है क्या आईना सादगी का
परेशां वो रश्क-ए-क़मर हो गया है

जहाँ थक के बैठूँ वहीं छाँव होगी
दुआ का मिरी ये असर हो गया है

नज़र जब मिली है हसीं चाँदनी से
चमकता हुआ ये शजर हो गया है

उसे अब ज़माने की परवाह ही क्या
जो 'क़ाज़ी' तेरा हम-सफ़र हो गया है
Dr Wasif Quazi