कभी पत्थरों को उछाला न कीजे
ख़ुदी को समय का निवाला न कीजे
उड़ानों की चाहत बहुत आपको है
कफ़स में परिंदों को पाला न कीजे
मिले ना मिले ये समय कीमती है
समय को समय पर यूँ टाला न कीजे
अगर वास्ता है अंधेरों से तो फिर
मेरे घर में कोई उजाला न कीजे
बहा दीजिए सब के सब आँसुओं में
कोई दर्द सीने में पाला न कीजे
Shravan Kumar