ABhishek Parashar

वो जो था जान से भी प्यारा मुझे
उस से करना पड़ा किनारा मुझे

ज़िंदगी हाथ से निकलती गई
वक़्त ने तिनका-तिनका मारा मुझे

रस्सियाँ घूरती रहीं मुझ को
पंखे ने देर तक पुकारा मुझे

'इश्क़ से यूँ भी दूर रहता हूँ
'इश्क़ में होता है ख़सारा मुझे

उसकी यादों ने रात-भर छेड़ा
नींद करती रही इशारा मुझे

जो मुकम्मल करे मेरी ख़्वाहिश
ढूँढना है वो एक तारा मुझे
ABhishek Parashar

ABhishek Parashar | We The Sukhanwar