Vishal Ojha 'Ehsaas'

दिखा कर झलकियां बारिश की फिर से उड़ गए बादल
मेरे महबूब से बांकी अदा ले उड़ गए बादल

धरी ही रह गईं तैयारियाँ सारे मुहल्ले की
मुंडेरों से कोई बोला, अरे रे उड़ गए बादल

तड़प कर रह गई मिट्टी, तरस कर रह गई बस्ती
पुकारा दिल ने रो-रो कर कि 'हाए' उड़ गए बादल

वो मिट्टी अब नहीं मिलती भिगो कर जिसको मन भीगे
'कहाँ जाएँ कहाँ बरसें' ये कह के उड़ गए बादल

मुहब्बत का परिंदा फड़फड़ा कर रह गया 'एहसास'
'हवा' को साथ अपने ले, घुटन दे उड़ गए बादल
Vishal Ojha 'Ehsaas'