बेचैनियाँ करतीं हैं ये ऐलान बदन मेंहै अब तो मिरी रूह परेशान बदन मेंधक धक सी मिरे सीने में करता है बराबरये आपका छोड़ा हुआ सामान बदन मेंमैं इश्क़-ओ-सुख़न ज़ब्त-ओ-सुकूँ हार गया हूँहोने हैं अभी और क्या नुकसान बदन मेंShashank Singh Thakur "SAAHIL"