Anuj Abr

जिस तरह उस द्रोपदी की थी सुनी फ़रियाद कृष्ण
ठीक वैसे ही करो मेरी भी तुम इमदाद कृष्ण

बात जब अर्जुन पे आई तो उठाया शस्त्र भी
तोड़ दी ख़ुद की प्रतिज्ञा ऐसे थे अपवाद कृष्ण

मित्रता का मोल अब कोई चुकाता हैं कहाँ
अब सुदामा को कहाँ करता है कोई याद कृष्ण

जानते थे वो कोई प्रस्ताव मानेगा नहीं
फिर भी दुर्योधन से करने को गए संवाद कृष्ण

कौन-सा जादू है आख़िर इस तुम्हारे नाम में
नाम लेते ही तुम्हारा मिट गया अवसाद कृष्ण
Anuj Abr