कौन जाने कौन-सी लाचारगी थी बेच दी
चंद रुपयों के इवज़ में उसने बेटी बेच दी
तीन-सौ गज़ का मकां लेने की ख़ातिर शह्र में
गाँव की उसने वो पुरखों की हवेली बेच दी
दी हुई मेरी थी सो रखने में मुश्किल थी उसे
इसलिए उसने वो सोने की अँगूठी बेच दी
एक न्योता क्या मिला सरकार से सम्मान का
कवि महोदय आपने तो लेखनी ही बेच दी
आज भी वो दिल का सौदा इस तरह करता है 'अब्र'
जैसे उसने चीज़ कोई इक ख़रीदी बेच दी
Anuj Abr