कभी रहा था मेरा जिससे मनमुटाव बहुत
उस एक शख़्स से मुझको है अब लगाव बहुत
इधर मिज़ाज में मेरे है एक बेफ़िक्री
उधर उस इश्क़ को चहिए था रखरखाव बहुत
मुझे ये बात बड़ी देर में समझ आई
किसी भी शख़्स को मत दीजिए सुझाव बहुत
लगा सकेगी नहीं आपकी सही क़ीमत
ये दुनिया वैसे भी करती है मोलभाव बहुत
उधर ही मोड़ दिया हमने अपनी नाव का रुख़
जिधर किसी ने बताया कि है बहाव बहुत
यक़ीन कौन करेगा तुम्हारी बातों पर
तुम्हारी बातों में वैसे भी है घुमाव बहुत
थपेड़े वक़्त के लगने भी चाहिए थे उसे
सुना है खा भी रहा था वो 'अब्र'भाव बहुत
Anuj Abr