Anuj Abr

कभी रहा था मेरा जिससे मनमुटाव बहुत
उस एक शख़्स से मुझको है अब लगाव बहुत

इधर मिज़ाज में मेरे है एक बेफ़िक्री
उधर उस इश्क़ को चहिए था रखरखाव बहुत

मुझे ये बात बड़ी देर में समझ आई
किसी भी शख़्स को मत दीजिए सुझाव बहुत

लगा सकेगी नहीं आपकी सही क़ीमत
ये दुनिया वैसे भी करती है मोलभाव बहुत

उधर ही मोड़ दिया हमने अपनी नाव का रुख़
जिधर किसी ने बताया कि है बहाव बहुत

यक़ीन कौन करेगा तुम्हारी बातों पर
तुम्हारी बातों में वैसे भी है घुमाव बहुत

थपेड़े वक़्त के लगने भी चाहिए थे उसे
सुना है खा भी रहा था वो 'अब्र'भाव बहुत
Anuj Abr

Anuj Abr | We The Sukhanwar