Anuj Abr

उदास आँखों में पहले तो कोई ख़्वाब बना
फिर उसके बाद उसे ख़ूब कामयाब बना

किसी की रात का बनना नहीं चिराग़ मुझे
अगर बना ही रहा है तो आफ़ताब बना

मेरी हयात में बेशक बना सवाल कई
हर इक सवाल का मेरे मगर जवाब बना

तुझी पे छोड़ दिया है ऐ मेरे कूज़ागर!
मुझे तू अच्छा बना या कि फिर ख़राब बना

अब और तुझसे चलाना नहीं मुझे रिश्ता
तेरा जो मुझपे निकलता है वो हिसाब बना

मेरे वजूद से लोगों को थोड़ी सीख मिले
मुझे जो फूल बनाना है तो गुलाब बना

पसन्द आने लगे हैं सभी को शेर तेरे
ग़ज़ल की 'अब्र' बहुत ज़ल्द इक किताब बना
Anuj Abr

Anuj Abr | We The Sukhanwar